बुधवार, 2 अगस्त 2017

संसद में प्रश्न




घट गई खेती 
मिट गये किसान
नहीं पूछा गया संसद में इसके बारे में कोई प्रश्न 


स्कूल कालेज से निकल 
सड़क और कारखानों के बीच 
धक्का खाते युवाओं पर भी 
नहीं पूछा गया संसद में कोई प्रश्न 

इस मानसून 
बाढ़ लील गई हजारों जाने 
नदियाँ उफन कर 
गली मोहल्लों में घुस गई 
संसद के मानसून सत्र में इस बारे में भी नहीं हुआ कोई हंगामा 

इस विषय पर कभी नहीं रुकी कोई कार्यवाही कि 
अस्पतालों में डाक्टर नहीं है 
नहीं है दवाइयां 
स्त्रियाँ अब भी मरती हैं लाखों में जनते हुए बच्चा 
मरे हुए लाश को ढोने के लिए भी नहीं है एम्बुलेंस 

 
दलगत विरोधों से ऊपर उठते हुए 
सांसद ऐसे स्याह प्रश्नों को उठा नहीं खराब करना चाहते हैं 
सब्सिडी वाले कैंटीन में बने मुर्गे का जायका
जबकि आंकड़े बता रहे हैं सस्ती हो रही हैं दालें, गेंहूं  आदि आदि।  

4 टिप्‍पणियां:

  1. जन की बात करने को फुर्सत कहा है इस लोकतंत्र को ... अपने अपने मसले तो सुलझा लें पहले ...

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  2. मसीहे लोकतंत्र के मौज में हैं अब बाकी की फुरसत में बात करेंगे।

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  3. नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति गुरूवार 3 अगस्त 2017 को "पाँच लिंकों का आनंद "http://halchalwith5links.blogspot.in के 748 वें अंक में लिंक की गयी है। चर्चा में शामिल होने के लिए अवश्य आइयेगा ,आप सादर आमंत्रित हैं। सधन्यवाद।

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  4. बहुत ही बेहतरीन article लिखा है आपने। Share करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। :) :)

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